अश्वत्थ प्रदक्षिणा – Ashwath Pradakshina Vrat

अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो पीपल के पेड़ की पूजा और प्रदक्षिणा पर केंद्रित होता है। पीपल का वृक्ष, जिसे अश्वत्थ भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है और माना जाता है कि इसमें देवताओं का वास होता है।

व्रत का महत्व:

  • विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत करती हैं।
  • अविवाहित महिलाएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का पालन कर सकती हैं।
  • यह व्रत संतान प्राप्ति, समृद्धि, स्वास्थ्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए भी किया जाता है।
  • पीपल के वृक्ष की पूजा करने से आध्यात्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

व्रत का विधि-विधान:

  • व्रत वाले दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पीपल के पेड़ के सामने एक चौकी या आसन का निर्माण करें।
  • गंगाजल से पेड़ को स्नान कराएं और चंदन, रोली, फूल और अक्षत चढ़ाएं।
  • धूप-दीप जलाकर मंत्रों का जाप करें।
  • “ॐ नमः शिवाय”, “ॐ विष्णवे नमः” और “ॐ पार्वत्यै नमः” जैसे मंत्रों का 108 बार जप करना अच्छा माना जाता है।
  • इसके बाद पीपल के पेड़ की 108 बार प्रदक्षिणा करें। प्रदक्षिणा दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) की जानी चाहिए।
  • परिक्रमा के दौरान मन भगवान का ध्यान और व्रत के संकल्प में लगा रहना चाहिए।
  • प्रदक्षिणा के बाद हाथ जोड़कर अपनी मनोकामनाएं कहें और भगवान से आशीर्वाद लें।
  • कुछ लोग फलों या मिठाई का भोग चढ़ाते हैं और जरूरतमंदों को दान करते हैं।
  • कुछ महिलाएं 13 बार प्रदक्षिणा करती हैं और व्रत को 13 सप्ताह या 13 सोमवार तक करने का संकल्प लेती हैं।

व्रत का समय:

  • अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन सोमवार और अमावस्या के दिन इसे करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

व्रत का पालन:

  • व्रत वाले दिन पूर्ण या आंशिक उपवास रखा जाता है। कुछ लोग केवल एक समय भोजन करते हैं, जबकि अन्य कुछ फलों या दूध आदि पर निर्भर रहते हैं।
  • क्रोध, झूठ बोलने और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए।
  • पूरे दिन धार्मिक ग्रंथों का पाठ, भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष:

अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत एक सरल लेकिन सार्थक धार्मिक अनुष्ठान है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल मिलते हैं और उसकी आध्यात्मिक उन्नति होती है। यदि आप आस्था और श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, तो आपको निश्चित रूप बुद्धिमत्ता, शांति और आनंद प्राप्त होगा।

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