प्रारंभिक ज्ञान:
हिन्दू धर्म में मंदिरों का विशेष महत्व है। हिन्दू परिवारों में घर के अंदर भी अक्सर मंदिर बनाए जाते हैं। हिंदू मंदिर को घर में कौन सा दिशा प्राप्त करना चाहिए, इस विषय पर बहुत मायने रखता है। इस लेख में हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे और बताएंगे कि हिन्दू मंदिर घर में किस दिशा को फेस करना चाहिए।
प्रश्न: हिन्दू मंदिर घर में किस दिशा को फेस करना चाहिए?
उत्तर: हिन्दू धर्म में, मंदिर को घर के ईशान कोण (पूर्व दिशा) की ओर प्राप्त कराना शुभ माना जाता है। यह दिशा सूर्योदय की ओर होती है और हिन्दू शास्त्रों में इसका विशेष महत्व बताया गया है। इसे “ईशान कोण” या “ईशान की दिशा” भी कहा जाता है।
प्रश्न: क्या घर में मंदिर होना जरूरी है?
उत्तर: नहीं, हर घर में मंदिर बनाना जरूरी नहीं है। यह व्यक्ति के आस्थानुसार होता है।
प्रश्न: क्या हम मंदिर को घर के अन्य कोने में भी बना सकते हैं?
उत्तर: हां, हम मंदिर को घर के अन्य कोनों में भी बना सकते हैं, लेकिन इसे ईशान कोण की दिशा में बनाने की प्राथमिकता है। इसका उद्देश्य यह होता है कि मंदिर हमेशा सूर्योदय की ओर देखें और कोण से प्राकृतिक प्रकाश प्राप्त करें।
प्रश्न: क्या हिन्दू मंदिर को खिड़कीयों के सामने या द्वार पास बनाना शुभ माना जाता है?
उत्तर: जी हां, हिन्दू मंदिर को घर के खिड़कीयों के सामने या द्वार पास बनाना शुभ माना जाता है। इससे मंदिर को धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है और यहां आराध्य देवता की प्रतिमा को शुभारंभ करने के लिए आसान पहुंच मिलती है।
हिन्दू धर्म में मंदिर को ईशान कोण (पूर्व दिशा) में बनाना शुभ माना जाता है। मंदिर को खिड़कीयों के सामने या द्वार पास बनाना भी शुभ माना जाता है। यहां आप अपने घर में मंदिर बनाने के लिए यह सुझाव प्राप्त करते हैं कि आप ईशान की दिशा में ही मंदिर बनाएं और खिड़कीयों के सामने या द्वार पास स्थापित करें।