अनंत शेष मंत्र एक पवित्र मंत्र है जो भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करता है। यह मंत्र हिंदू धर्म में बहुत लोकप्रिय है और इसका उपयोग विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।
अनंत शेष मंत्र का पाठ करने से भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह मंत्र भक्तों को शांति, समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करता है।
अनंत शेष मंत्र का पाठ करने के लिए, भक्तों को एक शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठना चाहिए। उन्हें एक माला और घी के दीपक को जलाना चाहिए। फिर, उन्हें मंत्र का 108 बार या अपनी इच्छा के अनुसार पाठ करना चाहिए।
अनंत शेष मंत्र निम्नलिखित है:
अनंत सागर महासमुद्रेमग्नान्समभ्युद्धर वासुदेव। अनंत रूपे विनियोजितात्माह्यनन्त रूपाय नमोनमस्ते॥
इस मंत्र का अर्थ है:
हे वासुदेव, जो अनंत सागर और महासमुद्र में डूबे हुए हैं, आप अनंत रूपों में विराजमान हैं। मैं आपको अनंत रूपों के स्वामी के रूप में नमन करता हूं।
अनंत शेष मंत्र का पाठ करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
- शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
- भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- जीवन में कठिनाइयों को दूर करने में मदद मिलती है।
- आध्यात्मिक विकास में सहायता मिलती है।