प्रसिद्ध पुस्तक हनुमान बाहुक के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास हैं।
गोस्वामी तुलसीदास, हिंदी साहित्य के भक्ति काल के एक महान कवि और संत थे। वे राम भक्ति शाखा के प्रमुख कवि माने जाते हैं और उन्होंने अपनी रचनाओं से रामचरितमानस को घर-घर तक पहुंचाया। तुलसीदास जी ने अनेक प्रसिद्ध ग्रंथों की रचना की, जिनमें रामचरितमानस के अलावा विनय पत्रिका, दोहावली, कवितावली, और गीतावली प्रमुख हैं।
उन्हीं की अमर कृतियों में से एक है हनुमान बाहुक। यह स्तुतिपरक रचना गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान जी की महिमा का वर्णन करती है। माना जाता है कि जब तुलसीदास जी शारीरिक पीड़ा से ग्रस्त थे, तब उन्होंने हनुमान जी की स्तुति में यह रचना की थी। हनुमान बाहुक में 44 छंद हैं, जिनमें हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और करुणा का सुंदर वर्णन किया गया है। यह रचना आज भी हनुमान भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और इसका पाठ शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है।
संक्षेप में, हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास की एक महत्वपूर्ण रचना है जो हनुमान जी की भक्ति और महिमा को दर्शाती है और आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है।