दक्षिण भारत के खेतों में जब धान की सुनहरी बालियां हवा में लहराती हैं और सूरज अपनी गर्मी से फसल को पकाता है, तभी मनाया जाता है पोंगल का रंगारंग और पावन त्योहार. यह सिर्फ फसल कटाई का जश्न नहीं, बल्कि सूर्यदेव और माता प्रकृति के आशीर्वाद का चार दिवसीय उत्साह है.
पोंगल की खुशियां चार दिनों तक फैलती हैं, हर दिन अपने खास अनुष्ठान और उत्सव के साथ:
- भोगी: पुराने कपड़े, बर्तन और सामान को आग में जलाकर, भोगी पाप और नकारात्मकता को दूर करता है और नए साल की शुद्ध शुरुआत का स्वागत करता है.
- थाई पोंगल: सुबह के पहले किरण के साथ ही उठकर लोग मिट्टी के बर्तनों में चावल, दूध और गुड़ से पवित्र पोंगल बनाते हैं. सूर्य को अर्पित किया जाता है ये पोंगल, उनके आशीर्वाद और फसल की समृद्धि के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हुए.
- माट्टू पोंगल: यह दिन पशुओं, फसल के असली साथियों का है. गायों और बैलों को नहलाया जाता है, उनके सींगों को रंगा जाता है और मीठा पोंगल खिलाया जाता है, एक सच्चे और खूबसूरत कृतज्ञता का भाव.
- कानूम पोंगल: रंगोली के रंग हवा में खुशियों को घोलते हैं, ढोल की थाप लोगों को थिरकाती है और घर-घर से हंसी की गूंज सुनाई देती है. यह दिन सामुदायिक जश्न का है, जहां खूबसूरत कोलम बनाए जाते हैं और हर्षोल्लास का वातावरण होता है.
पोंगल सिर्फ परंपरा और अनुष्ठानों से ज्यादा है. यह एक ऐसा त्योहार है जो परिवारों को एक साथ लाता है, लोगों के दिलों में कृतज्ञता भरता है और नए साल की उम्मीदों को जगाता है. हर गली में सुगंधित पोंगल की खुशबू, घरों की रंगीन सजावट और हवा में उड़ता उत्साह ही बताता है कि पोंगल कितना खास है.
Pongal festival date – 15th Jan 2024