What is uttarayan and dakshinayan – उत्तरायण और दक्षिणायण

उत्तरायण और दक्षिणायण: सूर्य की गतिशीलता के विश्‍लेषण का महत्‍व

उत्तरायण और दक्षिणायण दो वैज्ञानिक प्रभाव हैं जो हिंदी ज्योतिष शास्‍त्र में अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण माने जाते हैं। ये दोनों शब्‍द सूर्य के आकार और उसकी स्थिति को वर्णित करते हैं। इसलिए, इस लेख में हम इन दोनों प्रकार के गतिशीलता को गहराई से समझने की कोशिश करेंगे।

उत्तरायण और दक्षिणायण दो संस्‍कृत शब्‍दों से लिए गए हैं।

“उत्‍तर” शब्‍द से, जिसका अर्थ होता है “उठाना” या “चढ़ाना“, और “आयन” शब्‍द से, जिसका अर्थ होता है “यात्रा” या “चलना“

इश्‍वर वा किसी देवता से जुड़ा हुआ है। इसे हिंदी ज्योतिष में समय को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह समय पौष मास के मार्गशीर्षा और मकर संक्रांति के बीच होता है, जब सूर्य का उत्‍तरी गतिशील सीमा उसकी निर्धारित अक्‍स में पहुंचता है।

वैसे तो उत्तरायण हिंदी ज्योतिष में बहुत महत्‍वपूर्ण है, लेकिन इसे समझने के लिए आपको प्राकृतिक विज्ञान और खगोल शास्‍त्र से भी परिचित होना चाहिए। इसमें सूर्य के संपर्क के माध्‍यम से मानव समाज के जीवन के अर्थ और महत्‍व का विश्‍लेषण होता है। सूर्य द्वारा प्रेरित विभिन्‍न बिजली के प्रकार या भूमि पर उत्‍पन्‍न बंजर प्रभाव द्वारा हमारे जीवन को धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्‍टिकोण से प्रभावित किया जाता है।

उत्तरायण और दक्षिणायण के बारे में और विस्‍तृतता से जानने के लिए, हमें प्राथमिक रूप से ब्रह्मांड और सूर्य ग्रहण को समझना होगा। उत्तरायण के दिन को “वसंत ऋतु” के चरण माना जाता है, जब पौष मास की शुरुआत होती है और धार्मिक तथा मान्यताओं का समय ”पौष पूर्णिमा” माना जाता है।

आगे बढ़ते हुए दक्षिणायण के माध्‍यम से “तेजोमयी ऋतु” शुरू होती है। इस समय पर्वत आदि क्षेत्र पर बारिश का प्रारंभ होता है और जीवों के जीवन का प्राकृतिक संतुलन बहुत महत्‍वपूर्ण होता है। इस समय सूर्य पूरी शक्ति की ओर सार्धक मुड़ता है और यह हमारे जीवन पर विभिन्‍न प्रभाव डालता है।

उत्तरायण और दक्षिणायण का अध्‍ययन करने में अहम्‍यता है, क्‍योंकि इनका पता लगाना हमें ज़्‍यादा आत्‍म–जागृति, रक्षा क्षमता और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। यह सूर्य के साथ हमारे धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन से भी संबंधित है और हमे इन दोनों समय के सम्बंध में नियमित ध्यान देना चाहिए।

कन्‍यादान व्‍यापार, प्रवासी यात्रा, कर्मचार्‍य के उन्‍नति, देवताओं से अनुग्रह और विवाह जैसी महत्‍वपूर्ण गतिविधियाँ इन दोनों समयों पर आचार्य और पंडित द्वारा निर्धारित की जाती हैं। उत्तरायण और दक्षिणायण की परंपरा हमारे धार्मिक संस्कृति के महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है और हमेशा से हमारे जीवन में अद्‍भुत प्रभाव डालती रही है।

सारांश:
उत्तरायण और दक्षिणायण हिंदी ज्योतिष में ऐसे समयजाल को दर्शाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं जिसमें सूर्य का आकार और स्‍थिति मान ली जाती है। इन दोनों गतिशीलताओं को समझने के लिए हमें प्राकृतिक विज्ञान और खगोल शास्‍त्र से भी परिचित होना चाहिए। ये दोनों गतिशीलताएँ हमारे जीवन को धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से प्रभावित करती हैं।

 

FAQs:

  1. उत्तरायण और दक्षिणायण क्या हैं?
    उत्तरायण और दक्षिणायण दो संस्कृत शब्द हैं, जो सूर्य की गतिशीलता को वर्णित करते हैं। उत्तरायण वक्री गति में होता है जबकि दक्षिणायण में सूर्य की सूक्ष्म गति होती है।
  2. उत्तरायण और दक्षिणायण कब होते हैं?
    उत्तरायण हिंदी ज्योतिष में पौष मास के मार्गशीर्षा और मकर संक्रांति के बीच होता है, जबकि दक्षिणायण में चैत्र मास के अश्‍विन नक्षत्र मे प्रारंभ होता है

Leave a Comment